धरसींवा: लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन बिल पारित हुआ, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाना और गैर-मुस्लिमों को भी वक्फ बोर्ड में शामिल करना है। यह बिल अब राज्यसभा में पेश होगा और विधेयक में सरकार को वक्फ के खातों का ऑडिट कराने का अधिकार भी दिया गया है।
विधायक अनुज शर्मा ने वक्फ संशोधन बिल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह एक ऐतिहासिक निर्णय है, जो देश में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करेगा। इस बिल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों को भी कानून के दायरे में लाया गया है, जो पहले किसी भी न्यायिक समीक्षा से परे था। यह एक महत्वपूर्ण सुधार है, जिससे देश की न्यायिक प्रणाली को मजबूती मिलेगी।
विधायक शर्मा ने कहा कि भारत में वक़्फ़ संपत्तियों की संख्या अत्यधिक है और इसका समुचित उपयोग गरीब एवं जरूरतमंद मुस्लिम समुदाय के लोगों तक नहीं पहुँच पा रहा था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वक्फ संपत्तियों का लाभ मुस्लिम समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मिलना चाहिए, न कि कुछ विशेष लोगों तक सीमित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वक़्फ़ बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों में कई अनियमितताओं की पुष्टि हुई है, जिनका समाधान आवश्यक था। वक़्फ़ संपत्तियों पर हुए अनधिकृत कब्जों को हटाने और इन संपत्तियों का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कठोर प्रावधान किए हैं।
विपक्ष द्वारा बिल का विरोध अनुचित
विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि इस संशोधन के माध्यम से वक्फ ट्रिब्यूनल के निर्णयों को अब न्यायालय में चुनौती दी जा सकेगी, जो एक बड़ा सुधार है। पहले यह संभव नहीं था, जिससे कई विवादों का समाधान नहीं हो पाता था। अब न्याय की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगी। शर्मा ने विपक्ष द्वारा बिल के विरोध को अनुचित बताया और कहा कि यह किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में वक़्फ़ संपत्तियों पर हुए अनधिकृत कब्जों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे। श्री शर्मा ने इस निर्णय को राष्ट्रहित में बताया और कहा कि यह केवल वक़्फ़ संपत्तियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी धार्मिक संपत्तियों की पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत रहेगी।